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आधुनिक युग में प्रसार शिक्षा की बढ़ती आवश्यकता और महत्व

By Radio Shree Dev • 18 May 2026, 12:15 PM

शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह व्यक्ति के ज्ञान और व्यक्तित्व का विकास करती है। बदलते समय के साथ शिक्षा के स्वरूप में भी परिवर्तन आया है। आज शिक्षा केवल विद्यालयों और महाविद्यालयों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विभिन्न माध्यमों से समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही है। प्रसार शिक्षा का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाना तथा समाज में जागरुकता फैलाना है।


भारत जैसे विशाल देश में आज भी अनेक लोग आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक कारणों से नियमित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों तक ज्ञान पहुंचाने में प्रसार शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शिक्षा का ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति को घर बैठे भी ज्ञान प्राप्त करने का अवसर देता है।


प्रसार शिक्षा का अर्थ

"प्रसार शिक्षा" दो शब्दों से मिलकर बना है— "प्रसार" अर्थात फैलाव या विस्तार। इस प्रकार प्रसार शिक्षा का अर्थ है शिक्षा का व्यापक रूप से समाज में प्रसार करना।


प्रसार शिक्षा के अंतर्गत रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, पुस्तकें, इंटरनेट, मोबाइल, ऑनलाइन कक्षाएँ तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक शिक्षा पहुंचाई जाती है। इसका उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं है बल्कि लोगों को सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक रूप से जागरूक बनाना भी है।


प्रसार शिक्षा की आवश्यकता-

आज के आधुनिक युग में प्रसार शिक्षा की आवश्यकता बहुत बढ़ गई है। शिक्षा को सभी तक पहुँचाने के लिए देश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोग विद्यालयों तक नहीं पहुंच पाते। प्रसार शिक्षा ऐसे लोगों तक ज्ञान पहुंचाने का कार्य करती है।


समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और कृषि जैसे विषयों पर प्रसार शिक्षा समाज में जागरूकता फैलाती है।


आधुनिक ज्ञान प्रदान करने के लिए विज्ञान और तकनीक के इस युग में नई-नई जानकारियाँ लगातार सामने आती रहती हैं, प्रसार शिक्षा लोगों को आधुनिक तकनीक और नवीन ज्ञान से परिचित कराती है।


प्रसार शिक्षा के माध्यम-

रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट और ऑनलाइन शिक्षा, समाचार पत्र और पत्रिकाएं, पुस्तकालय, सामाजिक कार्यक्रम और शिविर आदि प्रसार शिक्षा के माध्यम हैं।


प्रसार शिक्षा के लाभ-


शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाती है।


लोगों को नई तकनीकों और कौशलों की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनाती है।


कृषि, पशुपालन और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहायक होती है।


महिलाओं को शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है।


प्रसार शिक्षा अंधविश्वास दूर करने में मदद करती है।


प्रसार शिक्षा की स्थिति-

1- भारत में प्रसार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अनेक योजनाएं शुरू की हैं।

2- दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। "स्वयं", "दीक्षा" और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का महत्व और अधिक बढ़ गया। उस समय प्रसार शिक्षा ने लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालाँकि अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है, इसलिए सरकार और समाज को मिलकर इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।


प्रसार शिक्षा की चुनौतियाँ-


ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली की कमी।


गरीबी, लोगों के पास मोबाइल और कंप्यूटर का अभाव।


तकनीकी ज्ञान की कमी।


शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी।


कई क्षेत्रों में संसाधनों और प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव।


निष्कर्ष-

प्रसार शिक्षा आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यह शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है। इसके द्वारा न केवल ज्ञान का प्रसार होता है, बल्कि समाज में जागरूकता, आत्मनिर्भरता और विकास भी बढ़ता है। आज के डिजिटल युग में प्रसार शिक्षा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो यह देश से अशिक्षा दूर करने और समाज को प्रगतिशील बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। शिक्षित और जागरूक समाज ही एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।